प्राग महल: एक विस्तृत कहानी

प्राग महल: एक विस्तृत कहानी

प्राग महल, जो भुज, कच्छ, गुजरात, भारत में आईना महल के ठीक बगल में स्थित है, एक 19वीं सदी का महल है जिसका एक समृद्ध इतिहास और अनूठी वास्तुकला है।

 इतिहास और निर्माण की शुरुआत

 * निर्माणकर्ता (Commissioned by): इस महल का नाम राव प्रागमालजी द्वितीय (जाडेजा राजवंश के एक प्रगतिशील शासक) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसके निर्माण का आदेश दिया था।

 * निर्माण की अवधि: निर्माण 1865 में शुरू हुआ और 1879 में पूरा हुआ, जिसमें एक दशक से अधिक का समय लगा।

 * लागत: उस समय महल के निर्माण में भारी-भरकम राशि 31 लाख रुपये (या ₹3.1 मिलियन) खर्च हुई थी। कुछ अन्य स्रोतों के अनुसार इसकी लागत 19 लाख कोरी थी।

 * समाप्ति: राव प्रागमालजी द्वितीय 1860 से 1875 में अपनी मृत्यु तक शासन करते रहे, लेकिन वह महल को पूरा होते नहीं देख सके। यह उनके बेटे खेगारजी तृतीय के शासनकाल में पूरा हुआ।

 * उद्देश्य: महल को यूरोपीय शैलियों को दर्शाने के लिए बनाया गया था, जो पश्चिमी डिज़ाइन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, और यह कच्छ के विकास और आधुनिकीकरण के लिए राव प्रागमालजी द्वितीय की दूरदर्शिता का प्रतीक था।

वास्तुकला शैली और निर्माण

 * वास्तुकार (Architect): महल को ब्रिटिश वास्तुकार कर्नल हेनरी सेंट क्लेयर विल्किंस ने डिज़ाइन किया था।

 * वास्तुशिल्प शैली: डिज़ाइन एक आकर्षक मिश्रण है, जिसे अक्सर इतालवी गोथिक या नव-गोथिक शैली के रूप में वर्णित किया जाता है। इसे रोमनस्क वास्तुकला या इंडो-सारासेनिक रिवाइवल शैली पर रोमनस्क वास्तुकला के प्रभाव के साथ भी वर्णित किया जाता है।

 * निर्माण सामग्री: निर्माण में उत्तम सामग्री का उपयोग किया गया था, जिसमें इतालवी संगमरमर और राजस्थान से लाया गया बलुआ पत्थर शामिल था।

 * कारीगरों का सहयोग: यह निर्माण एक महत्वपूर्ण कलात्मक सहयोग था, जिसमें कुशल इतालवी कारीगरों और स्थानीय कच्छी बिल्डर समुदाय, जिन्हें कच्छ के मिस्त्री या कच्छ के गैधर के नाम से जाना जाता है, की प्रसिद्ध कारीगरी शामिल थी। महल के कारीगरों को उनकी मजदूरी के रूप में सोने के सिक्के दिए गए थे।

 महल की मुख्य विशेषताएं

 * घड़ी टावर: महल को इसके शानदार 45-फीट (या 45-मीटर) ऊँचे घंटाघर (Clock Tower) से तुरंत पहचाना जा सकता है, जो पूरे भुज शहर का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है।

 * दरबार हॉल: भव्य दरबार हॉल एक प्रमुख विशेषता है, जो शास्त्रीय मूर्तियों और चमकदार झूमरों से सुसज्जित है।

 * आंतरिक विवरण: महल के हॉलों में कोरिंथियन स्तंभ और जटिल जाली का काम (पत्थर के काम की एक पारंपरिक भारतीय शैली) है जो यूरोपीय शैली के वनस्पतियों और जीवों को दर्शाता है। मुख्य हॉल में टैक्सिडर्मी (संरक्षित जानवरों के नमूने) का संग्रह भी है।

 * आँगन: महल के पीछे आँगन में अच्छी तरह से नक्काशीदार पत्थर के काम वाला एक छोटा हिंदू मंदिर भी स्थित है।

बाद का इतिहास और जीर्णोद्धार

 * क्षति: 2001 के गुजरात भूकंप से महल को गंभीर रूप से क्षति पहुँची थी।

 * चोरी: 2006 में, महल में चोरी हुई, जिसके परिणामस्वरूप लाखों रुपये के प्राचीन सामान चोरी हो गए और अन्य वस्तुओं को नुकसान पहुँचा।

 * जीर्णोद्धार: महल और टावर की बाद में मरम्मत की गई। अमिताभ बच्चन ने व्यक्तिगत रूप से महल के जीर्णोद्धार में रुचि ली थी। दरबार हॉल का जीर्णोद्धार महाराव प्रागमालजी तृतीय द्वारा ₹5 करोड़ की व्यक्तिगत लागत पर किया गया था।

 * वर्तमान स्थिति: महल अब आगंतुकों के लिए खुला है, जो मुख्य हॉलों में प्रवेश कर सकते हैं और क्लॉक टावर पर चढ़ सकते हैं। इसका रखरखाव और प्रदर्शन महाराव श्री मदनसिंहजी साहेब कच्छ परोपकारी ट्रस्ट, भुज द्वारा किया जाता है।

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