एक रेलवे नगर की उत्पत्ति

एक रेलवे नगर की उत्पत्ति

चित्तरंजन का इतिहास और चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW): भाप से बिजली तक का सफर

चित्तरंजन, पश्चिम बर्धमान जिले (पश्चिम बंगाल) में स्थित एक अनूठा, नियोजित औद्योगिक नगर और रेलवे कॉलोनी है, जो झारखंड की सीमा के पास स्थित है। इसका पूरा इतिहास चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) की स्थापना और विकास के साथ जुड़ा हुआ है, जो भारत के स्वतंत्रता के बाद के औद्योगिकीकरण प्रयासों का एक आधारशिला था।

एक रेलवे नगर की उत्पत्ति (पूर्व-1950)

स्वदेशी इंजनों की आवश्यकता

भारत में घरेलू लोकोमोटिव निर्माण इकाई का विचार 20वीं शताब्दी की शुरुआत से ही विचाराधीन था, लेकिन 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद इसका निर्माण महत्वपूर्ण हो गया। देश को अपने विशाल रेलवे नेटवर्क, जो राष्ट्र के लिए जीवनरेखा था, के लिए भारी उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता थी।

स्थल चयन

लोकोमोटिव फैक्ट्री के लिए मूल योजना पश्चिम बंगाल के काँचरापाड़ा के लिए थी, लेकिन भारत के विभाजन से उत्पन्न जटिलताओं के कारण इसे छोड़ दिया गया। रेलवे बोर्ड ने 1947 में एक नया स्थल स्वीकृत किया।

चुना गया स्थान, जो मौजूदा मिहिजाम रेलवे स्टेशन के पास था, एक घना जंगल वाला क्षेत्र था। इसे कई रणनीतिक लाभों के लिए चुना गया था:

 * भौगोलिक स्थान: यह हावड़ा-पटना-मुगलसराय मुख्य लाइन पर स्थित था, जिससे उत्कृष्ट कनेक्टिविटी मिलती थी।

 * स्थलाकृति (Topography): चट्टानी मिट्टी फैक्ट्री के लिए आवश्यक भारी नींव के लिए आदर्श थी, और ऊबड़-खाबड़ इलाका नियोजित टाउनशिप के लिए प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली में सहायक था।

 * बिजली की उपलब्धता: दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC) की योजनाओं ने आस-पास के स्टेशनों से हाइड्रो-इलेक्ट्रिक और थर्मल पावर की सुनिश्चित आपूर्ति सुनिश्चित की।

कार्यशाला का निर्माण आधिकारिक तौर पर अप्रैल 1948 में शुरू हुआ, जिसने चित्तरंजन टाउनशिप की नींव रखी।

स्थापना और नामकरण (1950)

CLW का जन्म

फैक्ट्री को शुरू में लोको बिल्डिंग वर्क्स नाम दिया गया था। पहले भाप इंजनों का उत्पादन आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1950 को शुरू हुआ, जो भारत के गणतंत्र घोषित होने की तारीख से मेल खाता था।

समर्पण और नामकरण

शहर और फैक्ट्री का नामकरण सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, वकील और राजनीतिक नेता, देशबंधु चित्तरंजन दास (1870–1925) के सम्मान में किया गया।

 * औपचारिक नामकरण: 1 नवंबर 1950 को, भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पहले स्वदेशी भाप इंजन को राष्ट्र को समर्पित किया और आधिकारिक तौर पर इस सुविधा का नाम चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) रख दिया।

 * पहला लोकोमोटिव: उत्पादित पहला लोकोमोटिव WG-श्रेणी का भाप इंजन था जिसका पंजीकरण संख्या 8401 था। फैक्ट्री और पूरी टाउनशिप का नाम देशबंधु दास के नाम पर रखना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनके विशाल योगदान को श्रद्धांजलि थी।

भाप और परिवर्तन का युग (1950–1993)

CLW जल्दी ही एक पूरी तरह से नियोजित रेलवे टाउनशिप के रूप में विकसित हो गया, जिसमें कर्मचारियों के क्वार्टर, अस्पताल, स्कूल और आवश्यक नागरिक बुनियादी ढाँचे शामिल थे, जो सभी विशाल फैक्ट्री परिसर का समर्थन करने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा प्रबंधित किए जाते थे।

भाप का युग (1950–1972)

CLW का प्रारंभिक ध्यान विशेष रूप से भाप इंजनों के निर्माण पर था। इस युग के दौरान, इसने ब्रॉड गेज और मीटर गेज दोनों तरह के भाप इंजनों का उत्पादन किया। अंतिम भाप इंजन, जिसका नाम उपयुक्त रूप से 'अंतिम सितारा' ('ANTIM SITARA') रखा गया, 1972 में रोल आउट हुआ, जिसने 5 विभिन्न प्रकार के 2,351 भाप इंजनों के निर्माण के बाद CLW में भाप इंजन उत्पादन लाइन के अंत को चिह्नित किया।

विविधीकरण और डीज़ल उत्पादन

जैसे-जैसे भारतीय रेलवे ने विद्युतीकरण और डीज़ल शक्ति की ओर बदलाव किया, CLW ने भी अपने उत्पादन को अनुकूलित किया:

 * इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव उत्पादन: यह 1961 में शुरू हुआ, जिसमें पहले 1500 V DC लोकोमोटिव, जिसका नाम 'लोकमान्य' था, को प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा कमीशन किया गया था। 25 kV AC लोकोमोटिव का उत्पादन 1963 में WAG-1 श्रृंखला के साथ शुरू हुआ, जिसका नाम 'विधान' रखा गया।

 * डीज़ल लोकोमोटिव उत्पादन: डीज़ल-हाइड्रोलिक लोकोमोटिव (मुख्य रूप से शंटिंग और छोटी लाइनों के लिए) का उत्पादन 1968 में शुरू हुआ। यह एक अल्पकालिक लाइन थी, जिसका उत्पादन 842 डीज़ल-हाइड्रोलिक लोकोमोटिव के उत्पादन के बाद 1993–1994 में बंद कर दिया गया।

आधुनिक इलेक्ट्रिक पावरहाउस (1994–वर्तमान)

इलेक्ट्रिक कर्षण पर ध्यान केंद्रित

सभी भाप और डीज़ल उत्पादन बंद करने के बाद, CLW ने उच्च-शक्ति वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के विशेषज्ञ निर्माता बनने पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित किया। इस कदम ने चित्तरंजन की स्थिति को उन्नत रेलवे प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में मजबूत किया।

तकनीकी प्रगति

CLW ने भारतीय रेलवे में अत्याधुनिक तकनीक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 * यह तीन-चरण वाले अत्याधुनिक GTO थाइरिस्टर-नियंत्रित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफलतापूर्वक निर्माण करने वाली दुनिया की पहली इकाइयों में से एक थी।

 * 1998 में, पहला स्वदेशी 6000 hp मालवाहक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव, WAG-9 ('NAVYUG' नाम दिया गया) का उत्पादन किया गया।

 * CLW उच्च-शक्ति वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव जैसे WAP-5, WAP-7, और WAG-9 श्रृंखला का निर्माण जारी रखता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माताओं में से एक बन गया है और भारत के रेलवे विद्युतीकरण लक्ष्यों में एक प्रमुख योगदानकर्ता है।

प्रमुख मील के पत्थर का सारांश

| वर्ष | घटना | महत्व |

|---|---|---|

| 1947 | रेलवे बोर्ड द्वारा स्थल की स्वीकृति। | मिहिजाम के पास फैक्ट्री स्थापित करने का निर्णय। |

| 1948 (अप्रैल) | कार्यशाला की स्थापना शुरू। | फैक्ट्री और टाउनशिप के निर्माण की शुरुआत। |

| 1950 (जन 26) | उत्पादन का उद्घाटन (लोको बिल्डिंग वर्क्स के रूप में)। | भारत के गणतंत्र बनने के साथ मेल खाता है; स्वदेशी भाप लोको उत्पादन की शुरुआत। |

| 1950 (नव 1) | चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) के रूप में नामकरण। | देशबंधु चित्तरंजन दास के नाम पर; पहला भाप इंजन समर्पित किया गया। |

| 1961 | इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव उत्पादन शुरू। | भाप से इलेक्ट्रिक शक्ति में संक्रमण की शुरुआत। |

| 1972 | भाप लोकोमोटिव उत्पादन बंद। | अंतिम भाप लोको, 'ANTIM SITARA,' रोल आउट हुआ। |

| 1993-94 | डीज़ल-हाइड्रोलिक उत्पादन बंद। | CLW एक समर्पित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माता बन गया। |

| 1998 | स्वदेशी 6000 hp WAG-9 लोको ('NAVYUG') का उत्पादन। | उच्च-शक्ति वाले तीन-चरण इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के वैश्विक निर्माताओं की लीग में प्रवेश। |

चित्तरंजन आज भी राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को चलाने के लिए स्वतंत्रता के बाद के युग में भारत सरकार द्वारा बनाए गए एक नियोजित औद्योगिक टाउनशिप का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना हुआ है, और इसकी पहचान भारतीय रेलवे की भाप से आधुनिक इलेक्ट्रिक कर्षण तक की यात्रा के इतिहास से अविभाज्य है।

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