चेन्नई (मद्रास) की स्थापना और प्रारंभिक वर्षों का इतिहास

चेन्नई (मद्रास) की स्थापना और प्रारंभिक वर्षों का इतिहास

चेन्नई, जिसे पहले मद्रास के नाम से जाना जाता था, एक ऐसा शहर है जिसका इतिहास इसके अलग-अलग हिस्सों में तो प्राचीन है, लेकिन एक एकीकृत शहरी इकाई के रूप में यह अपेक्षाकृत नया है। इसकी कहानी छोटे मछली पकड़ने वाले गाँवों और प्राचीन बस्तियों के एक संग्रह से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक चौकी और अंततः ब्रिटिश दक्षिण भारत की प्रशासनिक और वाणिज्यिक राजधानी—मद्रास प्रेसीडेंसी—तक के परिवर्तन की गाथा है। आधुनिक अर्थों में शहर की नींव 17वीं शताब्दी के मध्य में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के आगमन और स्थापना से जुड़ी हुई है।

I. प्राचीन पृष्ठभूमि: मद्रासपट्टनम से पहले

17वीं शताब्दी से पहले भी वह क्षेत्र जो अब चेन्नई है, एक उजाड़ भूमि नहीं था। यह तोंडैमंडलम नामक प्रांत के भीतर स्थित था, जिसकी राजधानी पूजनीय शहर कांचीपुरम थी। यह तटीय पट्टी, जो अपने वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध थी, सहस्राब्दियों से मानव बस्ती, व्यापार और सांस्कृतिक महत्व का केंद्र रही है।

 * माइलापुर और सान्थोम (San Thome): अंग्रेजों के आने से बहुत पहले, माइलापुर जैसे क्षेत्र प्रमुख थे। यूनानी भूगोलवेत्ता टॉलेमी ने दूसरी शताब्दी ईस्वी में इस क्षेत्र को माइलार्फॉन कहा था। माइलापुर एक व्यस्त बंदरगाह और सांस्कृतिक केंद्र था। इसके अलावा, सान्थोम (पुर्तगाली में सेंट थॉमस) बस्ती की उत्पत्ति ईसाई प्रेरित संत थॉमस की कथा से जुड़ी है, जिनके बारे में माना जाता है कि वह 52 से 70 ईस्वी के बीच इस क्षेत्र में आए और प्रचार किया। पुर्तगालियों ने 1522 में यहाँ एक बस्ती स्थापित की, जिससे यह कोरोमंडल तट पर यूरोपीय उपस्थिति का एक शुरुआती केंद्र बन गया।

 * राजवंशों का शासन: इस क्षेत्र पर क्रमिक रूप से प्रमुख दक्षिण भारतीय राजवंशों का शासन रहा:

   * प्रारंभिक चोलों ने पहली शताब्दी ईस्वी के दौरान इस क्षेत्र पर शासन किया।

   * पल्लवों ने सदियों तक सत्ता संभाली और 8वीं शताब्दी में ट्रिप्लिकेन में प्राचीन पार्थसारथी मंदिर का निर्माण किया।

   * उत्तरवर्ती चोलों ने 879 ईस्वी में पल्लवों को हराया।

   * जटावर्मन सुंदर पांड्या के नेतृत्व में पांड्यों ने 1264 ईस्वी में इस क्षेत्र को अपने शासन में ले लिया।

   * 15वीं शताब्दी तक, यह क्षेत्र शक्तिशाली विजयनगर साम्राज्य के प्रभाव में आ गया, जिसका मुख्यालय बाद में चंद्रगिरि में था। सम्राट की ओर से स्थानीय नायकों (सरदारों) ने तटीय इलाकों पर शासन किया।

II. आधुनिक शहर का उदय: ईस्ट इंडिया कंपनी और फोर्ट सेंट जॉर्ज (1639-1652)

आधुनिक चेन्नई की स्थापना का उत्प्रेरक ईस्ट इंडिया कंपनी की कोरोमंडल तट पर एक स्थायी व्यापारिक चौकी और कारखाने (गोदाम) की रणनीतिक आवश्यकता थी। EIC, जिसने पुलिकट (जहाँ डच पहले से थे) और अरमागाँव जैसे अन्य स्थानों पर संघर्ष किया था, वस्त्र उत्पादन केंद्रों के पास एक सुरक्षित और अधिक उपयुक्त स्थान की तलाश में थी।

 * भूमि अनुदान (22 अगस्त, 1639): शहर के इतिहास की औपचारिक तिथि 22 अगस्त, 1639 है। इस दिन, EIC के एक अधिकारी फ्रांसिस डे ने, अपने वरिष्ठ एंड्रयू कोगन के साथ मिलकर, दामास्र्ला वेंकटपति नायक से भूमि का एक टुकड़ा प्राप्त किया। वेंकटपति नायक, वांडिवाश के प्रभावशाली नायक और विजयनगर सम्राट, पेडा वेंकट राय के अधीन एक स्थानीय सरदार थे।

   * यह भूमि लगभग 6 मील लंबी और 1 मील अंतर्देशीय पट्टी थी, जिसमें एक छोटा द्वीप और मद्रासपट्टनम नामक मछली पकड़ने का गाँव शामिल था।

   * समझौते के तहत, EIC को एक वार्षिक किराया देना था और उसे वहाँ एक किलेबंद कारखाना बनाने की अनुमति दी गई।

 * नामकरण विवाद: मद्रास बनाम चेन्नई: शुरुआती इतिहास में शहर के नामकरण में एक द्वैत दिखाई देता है:

   * मद्रासपट्टनम: यह नई बस्ती के उत्तर में स्थित मूल मछली पकड़ने वाले गाँव का नाम था। माना जाता है कि 'मद्रास' नाम 'मद्रासपट्टनम' का ही संक्षिप्त रूप है।

   * चेन्नपट्टनम: नए किले के चारों ओर विकसित हुई बस्ती को स्थानीय लोग अक्सर चेन्नपट्टनम या चेन्नपट्टणम कहते थे। यह नाम अनुदान देने वाले नायक, दामास्र्ला वेंकटपति नायक के पिता दामास्र्ला चेन्नप्पा नायकुडू के सम्मान में रखा गया था।

   * अंग्रेजों ने शुरू में संयुक्त शहर के लिए मद्रासपट्टनम नाम का इस्तेमाल किया, हालांकि स्थानीय रिकॉर्ड और अनुदान भी चेन्नपट्टनम का उपयोग करते थे। समय के साथ, संक्षिप्त नाम 'मद्रास' पूरे क्षेत्र के लिए आधिकारिक, अंग्रेजी नाम बन गया।

 * फोर्ट सेंट जॉर्ज का निर्माण (1640): फरवरी 1640 में, डे और कोगन ने औपचारिक रूप से बस्ती की स्थापना की। किले का निर्माण शुरू हुआ, और 23 अप्रैल, 1640 (सेंट जॉर्ज दिवस) को यह औपचारिक रूप से पूरा हुआ, इसलिए इसका नाम फोर्ट सेंट जॉर्ज रखा गया। यह किला, भारत में पहली स्थायी और किलेबंद ब्रिटिश बस्ती, कोरोमंडल तट पर EIC के संचालन का आधिकारिक प्रशासनिक केंद्र बन गया।

III. विकास और समेकन: एक शहर का निर्माण (1652-1700)

फोर्ट सेंट जॉर्ज का निकटवर्ती क्षेत्र तेजी से एक दोहरी बस्ती के रूप में विकसित हुआ, जो उस समय के नस्लीय और सांस्कृतिक विभाजन को दर्शाता था।

 * व्हाइट टाउन और ब्लैक टाउन:

   * फोर्ट सेंट जॉर्ज की दीवारों के भीतर के क्षेत्र को व्हाइट टाउन (सफेद शहर) नामित किया गया था और यह अंग्रेजों और यूरोपीय निवासियों के लिए आरक्षित था। इसमें प्रशासनिक भवन, सेंट मैरी चर्च (भारत का सबसे पुराना एंग्लिकन चर्च, 1680 में प्रतिष्ठित), और EIC अधिकारियों के निवास थे।

   * किले की दीवारों के बाहर उत्तर की ओर तेजी से विकसित हुई बस्ती को ब्लैक टाउन (काला शहर, बाद में जॉर्ज टाउन नाम दिया गया) कहा जाता था। यह क्षेत्र भारतीय व्यापारियों, कारीगरों (बुनकर, धोबी, चित्रकार) और अन्य स्वदेशी सेवा प्रदाताओं का घर था, जिनके कौशल EIC के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण थे। इस अलग-अलग विकास ने शहरीकरण का एक ऐसा पैटर्न स्थापित किया जो सदियों तक कायम रहा।

   * किला, व्हाइट टाउन, और ब्लैक टाउन मिलकर मद्रास नामक एकीकृत बस्ती का निर्माण करते थे।

 * प्रेसीडेंसी की स्थापना (1652): मद्रास के बढ़ते व्यापार और रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, EIC ने 1652 में फोर्ट सेंट जॉर्ज को प्रेसीडेंसी (एक राष्ट्रपति द्वारा शासित प्रशासनिक इकाई) का दर्जा दिया, जिससे यह ब्रिटिश संचालन के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गया।

 * मेयर और निगम (1688): एलिहू येल (1687-1692) के शासनकाल में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ: 1687 में जारी एक रॉयल चार्टर के बाद मद्रास निगम (अब ग्रेटर चेन्नई निगम) का गठन 29 सितंबर, 1688 को हुआ। यह संस्था, जिसने एक मेयर और एल्डरमैन की स्थापना की, भारत में सबसे पुरानी जीवित नगरपालिका शासी निकाय और दुनिया में दूसरी सबसे पुरानी (लंदन निगम के बाद) है।

 * क्षेत्रीय अधिग्रहण: 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, EIC ने धीरे-धीरे अपना नियंत्रण बढ़ाया। 1693 में, कंपनी को स्थानीय नवाब से एक परवाना (मंजूरी) प्राप्त हुआ, जिसने तोंडियारपेट, पूरसावलकम और एग्मोर के आसपास के गाँवों को बस्ती को सौंप दिया, जिससे इसकी नगरपालिका सीमाएं और व्यापक हो गईं।

IV. 18वीं शताब्दी: संघर्ष और समेकन का केंद्र

18वीं शताब्दी मद्रास के लिए एक निर्णायक दौर था, जिसने इसे एक साधारण व्यापारिक चौकी से एक दुर्जेय राजनीतिक और सैन्य शक्ति केंद्र में बदल दिया, मुख्य रूप से अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच प्रतिद्वंद्विता के कारण।

 * कर्नाटक युद्ध: मद्रास भारत में वर्चस्व के लिए एंग्लो-फ्रांसीसी संघर्षों, जिन्हें कर्नाटक युद्धों के रूप में जाना जाता है, का एक प्रमुख युद्धक्षेत्र बन गया।

   * पहला कर्नाटक युद्ध (1746-1748): डुप्लेक्स के नेतृत्व में फ्रांसीसियों ने 1746 में फोर्ट सेंट जॉर्ज पर हमला किया और कब्जा कर लिया। फ्रांसीसियों ने दो साल तक ब्रिटिश बस्ती को अपने कब्जे में रखा। 1748 में एक्स-ला-चैपल की संधि द्वारा मद्रास को अंग्रेजों को वापस कर दिया गया। इस घटना ने किले की भेद्यता को उजागर किया और अंग्रेजों को इसकी किलेबंदी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

   * तीसरा कर्नाटक युद्ध (1758-1759): कॉम्टे डे लाली के नेतृत्व में फ्रांसीसियों ने फिर से मद्रास को घेर लिया। अंग्रेजों ने कई महीनों तक शहर की सफलतापूर्वक रक्षा की, जब तक कि एक राहत बेड़ा नहीं आ गया। ब्रिटिश जीत एक निर्णायक मोड़ साबित हुई, जिसने दक्षिण भारत में फ्रांसीसी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया।

 * मद्रास प्रेसीडेंसी का उदय: मुगल और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के पतन और फ्रांसीसियों की हार के साथ, अंग्रेज दक्षिण भारत में सर्वोच्च शक्ति बन गए। मद्रास इस बढ़ते साम्राज्य के लिए प्रशासनिक और सैन्य तंत्रिका केंद्र के रूप में कार्य करता था। 19वीं शताब्दी की शुरुआत (लगभग 1801) तक, अंग्रेजों ने अंतिम स्थानीय शासकों की शक्तियाँ छीन ली थीं, और मद्रास निर्विवाद रूप से एक विशाल क्षेत्र की राजधानी बन गया, जिसे मद्रास प्रेसीडेंसी के रूप में जाना जाता था, जिसमें आधुनिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और ओडिशा के कुछ हिस्से शामिल थे।

V. प्रारंभिक संस्थागत विकास और शहरी विस्तार (19वीं शताब्दी)

19वीं शताब्दी की शुरुआत मद्रास के लिए समेकन, संस्थागत विकास और भौतिक विस्तार का दौर था, जिसने इसे एक प्रमुख महानगरीय केंद्र के रूप में स्थापित किया।

 * बुनियादी ढाँचा: आधुनिक बुनियादी ढाँचे की शुरुआत से शहर के भूगोल में महत्वपूर्ण बदलाव आया:

   * रेलवे (1850 के दशक): दक्षिण भारत में पहली रेलवे लाइनों का निर्माण शुरू हुआ, जिसमें शहर ने दक्षिण भारतीय रेलवे के मुख्यालय के रूप में कार्य किया। पहले निर्माण की शुरुआत 1853 में हुई, जिससे मद्रास एक प्रमुख परिवहन केंद्र बन गया।

   * बंदरगाह परियोजना (1870 के दशक): गवर्नर लॉर्ड होबार्ट ने महत्वपूर्ण मद्रास बंदरगाह परियोजना शुरू की, जिसने कृत्रिम बंदरगाह को एक प्रमुख वैश्विक बंदरगाह में बदल दिया।

 * अग्रणी संस्थाएँ: मद्रास ने कई ऐसी संस्थाएँ स्थापित कीं जो भारत में 'पहली' थीं, जो इसकी प्रगतिशील प्रकृति को दर्शाती हैं:

   * मद्रास रेजिमेंट (1758): आधुनिक भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंटों में से एक।

   * मद्रास बैंक (1795): बाद में अन्य बैंकों के साथ विलय करके इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया बना, जो अंततः भारतीय स्टेट बैंक बन गया।

   * मद्रास सर्वे स्कूल (1794): 1858 में सिविल इंजीनियरिंग स्कूल बन गया, जो अब कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी है।

   * मद्रास मेडिकल कॉलेज (1835): एशिया के सबसे पुराने आधुनिक मेडिकल कॉलेजों में से एक।

   * मद्रास विश्वविद्यालय (1857): भारत के तीन सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक (कलकत्ता और बॉम्बे के साथ)।

   * मद्रास वेधशाला (1792): भारत में पहली आधुनिक वेधशाला।

 * सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य: शहर के विकास में ब्रिटिश, एंग्लो-इंडियन और विभिन्न दक्षिण भारतीय समुदायों, जिनमें तमिल, तेलुगु और अन्य शामिल थे, का मिश्रण और कभी-कभी टकराव देखने को मिला। इसी माहौल ने शताब्दी के बाद के दशकों में भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलनों के उदय को भी पोषित किया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 1880 के दशक में समर्थन मिलना शुरू हुआ।

VI. निष्कर्ष: एक नींव की विरासत

चेन्नई का इतिहास, 1639 में इसकी औपचारिक स्थापना से लेकर, व्यापार और साम्राज्य की खोज के लिए एक वाणिज्यिक शक्ति द्वारा जानबूझकर बनाए गए शहर की कहानी है। फोर्ट सेंट जॉर्ज और व्हाइट टाउन तथा ब्लैक टाउन की दोहरी बस्तियों की साधारण शुरुआत से, यह विशाल प्रशासनिक, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक महत्व का शहर बन गया। शुरुआती वर्षों ने महानगर के लिए आवश्यक खाका तैयार किया, उन संस्थाओं, बुनियादी ढाँचे और दोहरी विरासत—प्राचीन संस्कृति और औपनिवेशिक शक्ति दोनों की—को स्थापित किया जिसने इसे अगले तीन सदियों तक परिभाषित किया। 1996 में मद्रास का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर चेन्नई करना शहर की स्वदेशी पहचान को पुनः प्राप्त करने का अंतिम, औपचारिक कार्य था, एक ऐसा नाम जो लगभग चार शताब्दियों से चेन्नपट्टनम नाम में फुसफुसा रहा था।

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