कन्नौज का ऐतिहासिक अवलोकन (Historical Overview of Kannauj)
कन्नौज, जिसे ऐतिहासिक रूप से कान्यकुब्ज (अर्थात "कूबड़ी कन्या का शहर") के नाम से जाना जाता था, उत्तरी भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन इतिहासों में से एक है। यह अक्सर हजारों वर्षों तक एक निर्णायक राजनीतिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में कार्य करता रहा है।
प्राचीन और शास्त्रीय काल (Ancient and Classical Periods)
पूर्व-इतिहास और पौराणिक जड़ें (Pre-History and Mythological Roots)
* प्राचीनता: पुरातात्विक खोजें इंगित करती हैं कि यह क्षेत्र चित्रित धूसर मृद्भांड (लगभग 1200-600 ईसा पूर्व) और उत्तरी कृष्ण चमकीले मृद्भांड (लगभग 700-200 ईसा पूर्व) संस्कृतियों द्वारा बसा हुआ था, जो इसकी गहरी जड़ों को उजागर करता है। कांस्य युग के प्रागैतिहासिक हथियार और औजार भी पाए गए हैं।
* वैदिक काल (पांचाल साम्राज्य): वैदिक काल के दौरान, कन्नौज पांचाल साम्राज्य की राजधानी था। हिंदू महाकाव्यों जैसे महाभारत और रामायण के अनुसार, यह राजा अमावसु की राजधानी थी, जो ऋषि विश्वामित्र के पूर्वज थे।
* गुप्त साम्राज्य: कन्नौज गुप्त साम्राज्य (लगभग 320 से 550 ईस्वी) के दौरान एक महत्वपूर्ण शहर था, जो विद्वानों और बुद्धिजीवियों को आकर्षित करता था।
स्वर्ण युग: सम्राट हर्ष (The Golden Age: Emperor Harsha)
* मौखरी राजवंश (छठी शताब्दी ईस्वी): कन्नौज ने सबसे पहले मौखरी राजवंश के तहत शाही दर्जा हासिल किया।
* वर्धन राजवंश (सातवीं शताब्दी ईस्वी): इसका चरम महत्व 7वीं शताब्दी ईस्वी की शुरुआत में शुरू हुआ जब सम्राट हर्ष (हर्षवर्धन) ने अपनी राजधानी थानेसर से कन्नौज स्थानांतरित कर दी।
* हर्ष की शाही राजधानी के रूप में, कन्नौज सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से फला-फूला, प्रशासन, धर्म और व्यापार का एक विशाल केंद्र बन गया। चीनी बौद्ध यात्री ह्वेन त्सांग (Xuanzang) ने इस शहर का दौरा किया था।
* यह शहर महत्वपूर्ण गंगा व्यापार मार्ग पर स्थित था, जो इसे रेशम मार्ग से जोड़ता था।
⚔️ प्रारंभिक मध्यकाल: त्रिपक्षीय संघर्ष (The Tripartite Struggle)
647 ईस्वी में हर्ष की मृत्यु के बाद, उत्तरी भारत पर संप्रभुता के प्रतीक के रूप में कन्नौज के रणनीतिक महत्व ने इसे तीन प्रमुख शाही राजवंशों के बीच एक लंबे शक्ति संघर्ष का केंद्र बना दिया।
| राजवंश (Dynasty) | शासन और भूमिका (Reign and Role) |
|---|---|
| गुर्जर-प्रतिहार (पश्चिम/उत्तर) | उन्होंने अंततः कन्नौज पर नियंत्रण हासिल कर लिया और 8वीं से 10वीं शताब्दी तक इसे अपने साम्राज्य की गद्दी बनाया, एक विशाल क्षेत्र पर शासन किया। |
| पाल (पूर्व) | बंगाल क्षेत्र के शासक जिन्होंने अक्सर शहर पर नियंत्रण के लिए संघर्ष किया। |
| राष्ट्रकूट (दक्षिण) | दक्कन क्षेत्र का राजवंश जिसने अक्सर शहर पर छापा मारा और अस्थायी रूप से कब्जा किया। |
लगभग दो शताब्दियों तक चला यह संघर्ष त्रिपक्षीय संघर्ष के नाम से जाना जाता है।
???? उत्तर मध्यकाल: पतन और आक्रमण (Later Medieval Period: Decline and Invasions)
गाहड़वाल राजवंश (The Gahadavala Dynasty)
* 11वीं और 12वीं शताब्दी में, कन्नौज ने गाहड़वाल राजवंश के शासनकाल में अपना कुछ महत्व फिर से प्राप्त किया।
* राजा गोविंदचंद्र के अधीन, शहर "अभूतपूर्व गौरव" तक पहुंच गया, और इसे प्रारंभिक मध्यकालीन भारत का सबसे धनी शहर माना जाता था।
* शहर के अंतिम महान स्वतंत्र हिंदू शासक जयचंद्र (Jayachandra) थे, जिनका पृथ्वीराज तृतीय (दिल्ली के चौहान शासक) के साथ संघर्ष लोककथाओं में प्रसिद्ध है, जिसमें जयचंद्र की बेटी संयोगिता के प्रसिद्ध अपहरण की कहानी शामिल है।
विदेशी आक्रमण और सल्तनत शासन (Foreign Invasions and Sultanate Rule)
* महमूद गजनवी (1018 ईस्वी): इस शहर को महमूद गजनवी ने नष्ट कर दिया था, जिससे इसके बुनियादी ढांचे और राजनीतिक स्थिति को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा।
* लूट और विनाश (1194 ईस्वी): मुहम्मद गोरी की सेनाओं द्वारा 1194 ईस्वी में शहर को फिर से लूटा गया, जिससे यह लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गया और इसने अपनी शाही प्रमुखता स्थायी रूप से खो दी।
* दिल्ली सल्तनत: इस क्षेत्र को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया गया, जिसके बाद यह एक शाही राजधानी के बजाय एक क्षेत्रीय कस्बा बन गया।
???? मुगल और बाद के काल (Mughal and Later Periods)
* मुगल साम्राज्य: मुगलों के अधीन कन्नौज एक क्षेत्रीय रूप से प्रासंगिक शहर बना रहा।
* यह संक्षेप में 1527 में अफगानों से हार गया था, लेकिन बाद में मुगल साम्राज्य को बहाल कर दिया गया।
* सम्राट अकबर ने इसे एक सरकार (प्रशासनिक इकाई) का मुख्यालय बनाया।
* इत्र (प्राकृतिक इत्र) की परंपरा, जिसके लिए कन्नौज आज प्रसिद्ध है, इसी काल से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है, जिसमें मुगल रानी नूर जहाँ को गुलाब के इत्र की खोज और विकास का श्रेय दिया जाता है।
* ब्रिटिश शासन: यह शहर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के तहत उत्तर-पश्चिमी प्रांतों का हिस्सा बन गया।
* स्वतंत्रता के बाद: कन्नौज को भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में एकीकृत किया गया। इसे 1997 में फर्रुखाबाद से एक अलग जिले के रूप में बनाया गया था।
अपनी राजनीतिक स्थिति खोने के बावजूद, कन्नौज ने एक मजबूत सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी है, खासकर "भारत की इत्र राजधानी" (इत्र नगरी) के रूप में, एक ऐसी विरासत जो आज भी जारी है।