ओडिशा

ओडिशा

ओडिशा: राज्य का विवरण
ओडिशा, भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक राज्य है, जो अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
| विवरण (Detail) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| स्थापना वर्ष (Establishment Year) | 1 अप्रैल, 1936। यह भाषाई आधार पर गठित होने वाला ब्रिटिश-पूर्व भारत का पहला राज्य था। इस दिन को उत्कल दिवस (ओडिशा दिवस) के रूप में मनाया जाता है। |
| सीमाएँ (Borders) | उत्तर और उत्तर-पूर्व में झारखंड और पश्चिम बंगाल, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, और पश्चिम में छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। |
| जनसंख्या (Population) | 4,19,74,218 (2011 की जनगणना के अनुसार)। यह क्षेत्रफल के अनुसार 9वाँ और जनसंख्या के अनुसार 11वाँ सबसे बड़ा राज्य है। |
| बोली जाने वाली भाषाएँ (Languages Spoken) | ओड़िया (Odia) आधिकारिक भाषा है, जो बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोली जाती है। इसके अलावा, हिंदी, उर्दू, बंगाली, और विभिन्न मुंडा और द्रविड़ जनजातीय भाषाएँ भी बोली जाती हैं। |
| वर्तमान धर्म (Religion in Present) | हिंदू धर्म बहुसंख्यक है (94.35%)। मुस्लिम (2.07%) और ईसाई (2.44%) सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। |
  ओडिशा में राष्ट्रपति शासन
भारतीय संविधान लागू होने के बाद से अब तक ओडिशा में 8 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। पहला राष्ट्रपति शासन 1961 में लगा था।
  ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की सूची (आज़ादी के बाद)
यह आज़ादी के बाद से ओडिशा के कुछ प्रमुख मुख्यमंत्रियों की सूची है, जिसमें उनके कार्यभार ग्रहण करने और छोड़ने की तिथि दी गई है:
| मुख्यमंत्री का नाम | पदभार ग्रहण (Joined Date) | पदभार छोड़ा (Left Date) |
|---|---|---|
| डॉ. हरेकृष्ण महताब | 15 अगस्त 1947 | 12 मई 1950 |
| श्री नवकृष्ण चौधरी | 12 मई 1950 | 19 अक्टूबर 1956 |
| डॉ. हरेकृष्ण महताब | 19 अक्टूबर 1956 | 25 फरवरी 1961 |
| राष्ट्रपति शासन | 25 फरवरी 1961 | 23 जून 1961 |
| श्री बीजू पटनायक | 23 जून 1961 | 2 अक्टूबर 1963 |
| श्रीमती नंदिनी सत्पथी | 14 जून 1972 | 3 मार्च 1973 |
| राष्ट्रपति शासन | 3 मार्च 1973 | 6 मार्च 1974 |
| श्रीमती नंदिनी सत्पथी | 6 मार्च 1974 | 16 दिसंबर 1976 |
| श्री जानकी बल्लभ पटनायक | 9 जून 1980 | 7 दिसंबर 1989 |
| श्री बीजू पटनायक | 5 मार्च 1990 | 15 मार्च 1995 |
| श्री नवीन पटनायक | 5 मार्च 2000 | 11 जून 2024 |
| श्री मोहन चरण माझी | 12 जून 2024 | वर्तमान |
ध्यान दें: एक मुख्यमंत्री के कई गैर-लगातार कार्यकाल हो सकते हैं, और कार्यकालों के बीच की अवधि में राष्ट्रपति शासन या कोई अन्य मुख्यमंत्री रहा हो सकता है।
  विश्वव्यापी या भारत में प्रसिद्ध स्थान और उत्पाद
  प्रसिद्ध स्थान
ओडिशा अपने समुद्री तट, प्राचीन मंदिरों और वन्यजीव अभ्यारण्यों के लिए विश्वभर में जाना जाता है:
 * कोणार्क सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple) : यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। यह 13वीं शताब्दी का एक शानदार मंदिर है जो रथ के आकार में बना है और अपनी जटिल पत्थर की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
 * जगन्नाथ मंदिर, पुरी: हिंदुओं के चार पवित्र चार धाम तीर्थस्थलों में से एक। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा (Chariot Festival) का आयोजन करता है।
 * लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर: कलिंग वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण, जो भगवान शिव को समर्पित है। भुवनेश्वर को "भारत का मंदिर शहर" भी कहा जाता है।
 * चिल्का झील (Chilika Lake): भारत और एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून (तटीय झील), जो प्रवासी पक्षियों और इरावदी डॉल्फ़िन के लिए प्रसिद्ध है।
 * भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान (Bhitarkanika National Park): घने मैंग्रोव वनों और भारत में खारे पानी के मगरमच्छों की सबसे बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है।
  प्रसिद्ध उत्पाद और हस्तशिल्प
ओडिशा में कला और शिल्प की एक जीवंत परंपरा है जो भारत और दुनिया भर में प्रशंसित है।
 * पट्टचित्र (Pattachitra): कपड़े पर आधारित एक पारंपरिक स्क्रॉल पेंटिंग, जो अपनी विस्तृत नक्काशी, पौराणिक कथाओं के चित्रण और प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लिए प्रसिद्ध है।
 * रेत कला (Sand Art) : विशेष रूप से पुरी में प्रसिद्ध, जहाँ समुद्र तट की रेत का उपयोग करके मूर्तियां बनाई जाती हैं। यहाँ अंतर्राष्ट्रीय रेत कला महोत्सव भी आयोजित होता है।
 * चाँदी की तारकशी (Silver Filigree - Tarakasi): अत्यंत नाजुक और महीन कला, जिसमें पतले चांदी के तारों का उपयोग करके आभूषण और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। यह मुख्य रूप से कटक में किया जाता है।
 * ओडिशा हथकरघा (Handlooms): इसमें संबलपुरी इकत (टाई-डाई), बोमकाई और बरहामपुरी जैसी प्रसिद्ध रेशमी साड़ियाँ शामिल हैं, जो अपने अद्वितीय बुनाई पैटर्न के लिए जानी जाती हैं।
 * पुरी खाजा (Puri Khaja): एक विशिष्ट परतदार मिठाई, जिसे चीनी की चाशनी में भिगोया जाता है और जिसे भगवान जगन्नाथ के छप्पन भोग में से एक के रूप में परोसा जाता है।
 * छेना पोड़ा (Chhena Poda): ओडिशा की एक अनूठी पनीर मिठाई, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'जला हुआ पनीर'। इसे बेक करके बनाया जाता है और यह अपने कैरामेल स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।

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