झारखंड में PESA नियमावली लागू: जनजातीय स्वशासन और ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण का नया युग
एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, झारखंड सरकार ने जनवरी 2026 में पेसा (पंचायत उपबंध - अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। साल 2000 में बिहार से अलग होने के लगभग 25 साल बाद, राज्य ने जनजातीय आबादी की स्वशासन की पुरानी मांग को पूरा किया है।
लेख: झारखंड में जनजातीय संप्रभुता का नया अध्याय
झारखंड में पेसा नियमों का लागू होना केवल एक कानूनी अधिसूचना नहीं है, बल्कि यह "अबुआ डिशोम, अबुआ राज" (हमारा गांव, हमारा राज) की संकल्पना को धरातल पर उतारने जैसा है। ये नियम पूर्ण रूप से 13 जिलों (जैसे राँची, खूंटी, पश्चिम सिंहभूम) और आंशिक रूप से 3 अन्य जिलों में लागू होंगे। अब सत्ता का केंद्र सरकारी दफ्तरों से हटकर ग्राम सभा के पास आ जाएगा।
झारखंड पेसा नियमावली की मुख्य बातें:
* ग्राम सभा की सर्वोच्चता: ग्राम सभा अब गांव के विकास, सामाजिक न्याय और संसाधन प्रबंधन के लिए प्राथमिक निर्णय लेने वाली संस्था होगी।
* प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण: जनजातीय समुदायों को अब 'जल, जंगल और जमीन' पर कानूनी अधिकार मिलेगा, जिसमें लघु वनोपज (जैसे तेंदू पत्ता और महुआ) पर उनका मालिकाना हक शामिल है।
* पारंपरिक कानूनों का संरक्षण: ये नियम मानकी-मुंडा और माझी-परगना जैसी पारंपरिक जनजातीय शासन प्रणालियों को औपचारिक मान्यता प्रदान करते हैं।
* भूमि अधिग्रहण से सुरक्षा: अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना विकास परियोजनाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा।
PESA क्या है? (संविधान के भीतर संविधान)
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 एक केंद्रीय कानून है। यह संविधान के 73वें संशोधन (पंचायती राज) के प्रावधानों को भारत के पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में विस्तारित करता है। ये वो क्षेत्र हैं जहाँ जनजातीय आबादी अधिक है और जिन्हें अपनी संस्कृति बचाने के लिए विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।
पेसा अधिनियम के मुख्य प्रावधान:
* प्रत्यक्ष लोकतंत्र: सामान्य पंचायतों में जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि निर्णय लेते हैं, वहीं पेसा पूरे गांव (ग्राम सभा) को योजनाएं और परियोजनाएं मंजूर करने की शक्ति देता है।
* अनिवार्य आरक्षण: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों की कम से कम 50% सीटें अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा, सभी स्तरों पर अध्यक्ष का पद केवल ST के लिए आरक्षित होगा।
* विवाद निपटारा: ग्राम सभाओं को छोटे स्थानीय विवादों को पारंपरिक प्रथागत कानूनों के माध्यम से सुलझाने का अधिकार दिया गया है।
किसी भी राज्य के लिए PESA क्यों महत्वपूर्ण है?
झारखंड, छत्तीसगढ़ या ओडिशा जैसे जनजातीय बहुल राज्यों के लिए पेसा "स्वर्ण मानक" शासन प्रणाली है, क्योंकि:
* शोषण पर रोक: ग्राम सभा को लघु खनिजों और जल निकायों पर नियंत्रण देकर, यह बाहरी ठेकेदारों द्वारा स्थानीय संसाधनों के दोहन को रोकता है।
* सामाजिक सद्भाव: यह शराब की बिक्री को विनियमित करने और साहूकारी (Money-lending) पर नियंत्रण रखने की शक्ति देता है, जो जनजातीय ऋणग्रस्तता के दो सबसे बड़े कारण रहे हैं।
* पर्यावरण संरक्षण: जनजातीय समुदाय जंगलों के प्राकृतिक संरक्षक हैं। पेसा उन्हें कानूनी रूप से अपने आवास की रक्षा करने का अधिकार देता है।
* पहचान का संरक्षण: यह जनजातीय संस्कृति को उसकी विशिष्ट भाषा, रीति-रिवाजों और सामाजिक संहिताओं के साथ फलने-फूलने का अवसर देता है।